Poetry

भोर और तुम

भोर भए सूरज सी उगना, हर सिम्त ख़ुदी में जगमग दिखना, आकाश न भी सिमटे मुट्ठी में, बनकर के उजाला रोशन दिखना। किरणों को अपनी सखी बनाना, नूर हर इक कोने तक लाना, फूलों को देकर के उजाले, खुद में उनका खिलना रखना। जब घुले हवा में तेरे उजाले, पंछी भी परवाज़ संभाले, देख के […]

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