बीते कुछ दिनों से, या यूँ कहूँ कि कुछ महीनों से, एक अलग तरह की उधेड़बुन में आसपास के साथियों और मित्रों को देख रही हूँ। कारण? कारण यह कि उनके बच्चे इस साल ‘बोर्ड्स’ देंगे। लाज़िमी भी है अभिभावकों का यूँ फिक्रमंद होना या बेहतरी की दुआएँ करना, क्योंकि हमारी दुनिया का तानाबाना ऐसा […]