बच्चों के नाम

शुभाशीष (सत्र 2025-26)

बीते कुछ दिनों से, या यूँ कहूँ कि कुछ महीनों से, एक अलग तरह की उधेड़बुन में आसपास के साथियों और मित्रों को देख रही हूँ। कारण? कारण यह कि उनके बच्चे इस साल ‘बोर्ड्स’ देंगे। लाज़िमी भी है अभिभावकों का यूँ फिक्रमंद होना या बेहतरी की दुआएँ करना, क्योंकि हमारी दुनिया का तानाबाना ऐसा […]

Article

बुनावट

कहानियाँ लिख नहीं पाती इसलिए क़िस्से लिखने की कोशिश करती हूँ। निराशा के अनुभवों से उपजे सवालों के जवाब जब आसपास मिलें तो समझना आसान नहीं होता पर ज़रूरी होता है। अमूमन, उदासी और दर्द से घिरे इंसान से हम यही कहते हैं कि जो भी मुश्किल है उसके हल की ओर ध्यान दो। हो […]

Stories

लैंडमार्क

“अरे यार! कोई लैंडमार्क तो बताओ ना। मैं आसपास ही हूँ गूगल मैप के हिसाब से”- राज ने झल्लाते हुए फ़ोन पर कहा। “इतना चिढ़ कर आना है तो आने का क्या फायदा है”- फ़ोन के दूसरी तरफ़ मौजूद निधि ने रूठे हुए स्वर में जवाब दिया। भनभनाते हुए बोली – “ITC, बंगाल है लैंडमार्क। […]

Poetry

विदा

मुझे हमेशा लगता है आँखो में नमी और सुकून की कमी छुपाते हुए जो हाथ मज़बूती से सूटकेस को थाम कर चढ़ते हैं किसी रेलगाड़ी में या उड़ते हैं हवाई जहाज में वो हाथ उस वक़्त अलविदा में हिलते हाथों से कहीं ज़्यादा कमज़ोर होते हैं . . बस उनका काँपना होता है भीतर की […]

शजर शृंखला

शजर-5

कोई वक़्त तकता, कोई पहर देखता है, मेरा दिल वो सूखा शजर देखता है है शुकराना उन बेज़ुबाँ पंछियों को, सूखी डालों का भी, रहा ख़्याल जिनको बाक़ि ये ज़माना है मशगूल ख़ुद में, कोई इधर देखता है, कोई उधर देखता है, मेरा दिल वो सूखा शजर देखता है… तकते हैं उसकी जानिब, कई लोग […]

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